श्रीडूंगरगढ़ भाजपा और कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा
घर और पार्टी का कार्यालय एक साथ होना बनता है विरोध का कारण
किसी भी राजनीति पार्टी का कार्यालय ऐसे स्थान पर होना चाहिए जहां पार्टी के कार्यकर्ता कभी भी निर्भीक होकर आ सके जबकि हालत इसके विपरीत है। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में दोनों ही बड़ी पार्टियों का कार्यालय नेताओं के घर पर ही चलता है। पार्टी कार्यालय नेताओं के घर पर होने की वजह से पार्टी से जुड़े कार्यकर्ता उसको निजी कार्यालय समझते हैं यानी विधायक सेवा केंद्र, पूर्व विधायक सेवा केंद्र जबकि पार्टी का कार्यालय अलग होना पार्टी को मजबूत करता है कमजोर हो नहीं । किसी भी पार्टी में कितने भी प्रतिद्वंद्वी हो सकते है पार्टी कार्यालय अलग होगा तो सभी प्रतिद्वंदी वहां पहुंचेंगे और पार्टी मजबूत बनेगी कार्यकर्ताओं का जुड़ाव रहेगा लेकिन कार्यालय पदाधिकारीयो के घर पर होगा तो पार्टी के अंदर रहने वाले टिकट के दावेदार और प्रतिद्वंद्वी जिस तरह पार्टी कार्यालय में आते हैं उस तरह नहीं आयेंगे क्योंकि व बाध्य नहीं की किसी व्यक्ति विशेष के घर में चल रहे पार्टी कार्यालय में जाएं परिणाम पार्टी कमजोर होगी व अपने सही विचार नहीं रख पाएंगे। जब भी किसी पार्टी कार्यक्रम होता है तो आने वाले कार्यकर्ताओं की संख्या कम रहती हैं कारण साफ है अलग-अलग कार्यकर्ता अपने अलग-अलग नेता का समर्थक होता है जरूरी नहीं कि व विधायक या प्रधान ही बने दावेदार तो होते ही है इसी तरह के हालात श्रीडूंगरगढ़ में दोनों पार्टियों के बीच चल रहे हैं।
कांग्रेस कार्यालय मुख्य तौर पर पूर्व विधायक मंगलाराम गोदारा के प्रतिष्ठान पर चल रहा है और हालात यह है की पार्टी के ही अन्य दावेदार उनके नेतृत्व को स्वीकार नहीं कर रहे हैं और यहां नहीं आना चाहते या फिर उनको बुलाया ही नहीं जाता इसका मुख्य कारण है पार्टी कार्यालय उनके निजी स्थान पर होना ।
बात करें भारतीय जनता पार्टी की तो उनके कार्यालय पहले अलग से चला था लेकिन विधायक बनने के बाद विधायक निवास को ही पार्टी कार्यालय बना दिया गया और विधायक सेवा केंद्र में ही तब्दील कर दिया गया जबकि विधायक सेवा केंद्र अलग होता है पार्टी कार्यालय अलग। श्रीडूंगरगढ़ में विधायक सेवा केंद्र में ही पार्टी कार्यालय को पूरी तरह से मर्ज कर दिया गया है ।परिणाम बाकी के जो भी दावेदार हैं व किसी बड़े कार्यक्रम को छोड़कर कभी भी इस कार्यालय में नहीं आते हैं क्योंकि पार्टी कार्यालय विधायक सेवा केंद्र बन चुका है। पार्टी के दूसरे गुट के लोग इनके अधीन रहकर काम नहीं करना चाहते क्योंकि संगठन या पार्टी का आम कार्यकर्ता अपनी भावनाओं का सम्मान चाहता है व पार्टी कार्यालय में मिल सकता है निजी सेवा केंद्र पर नहीं।
परंतु कहते हैं जिसकी लाठी उसकी भैंस जैसा इनकी मर्जी होगी वैसा चलाएंगे ।
लेकिन दोनों ही पार्टियों में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है समय रहते नेताओं को इस पर मंथन करना चाहिए ताकि सभी पार्टियों मजबूत बनी रहे। किसी भी पार्टी में जितने भी दावेदार है वह अपना-अपना निजी कार्यालय कहीं पर भी चला सकते हैं लेकिन विधानसभा मुख्यालय पर पार्टी का कार्यालय अलग से हो तो कार्यकर्ताओं का जुड़ाव बढ़ेगा हर स्तर का कार्यकर्ता वहां पहुंचेगा और अपनी बात बिना किसी डर के संगठन के लोगों के सामने रख पाएगा ।
*यह हमारे स्वतंत्र विचार है दोनों ही पार्टियों के लिए*
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