श्रीडूंगरगढ़ शहर की सरकार (नगर पालिका) के कारनामे टेंडर का बड़ा खेल पढ़े पूरी खबर, टेंडर पुराण सीरीज वन

May 8, 2026 - 08:05
May 8, 2026 - 08:11
 0  491
श्रीडूंगरगढ़ शहर की सरकार   (नगर पालिका) के कारनामे   टेंडर का बड़ा खेल पढ़े पूरी खबर, टेंडर पुराण सीरीज वन

न्यूज 7 नेटवर्क श्रीडूंगरगढ़। शहर की सरकार (नगरपालिका) के कारनामे..

टेंडर पुराण-भाग संख्या-1

क्या आपको पता है.. बस अड्डे का टेंडर निकल चुका है। बिना किसी प्रचार प्रसार के 

नगरपालिका ने तो नही किया प्रचार, लेकिन हम बता रहे है आपको पूरी हकीकत। पढ़े.... टेंडर पुराण सीरीज वन 

श्रीडूंगरगढ़-

कस्बे की नगरपालिका नीत नए विवादों के कारण सुर्खिया बटोर रही है। बात चाहे नियम विरुद्ध पट्टो की हो ,सरकारी जमीन पर कब्जे या फिर ईओ की नियुक्ति..

पालिका की कार्यशैली लगातार विवादित ही रही है। अब एक बार फिर से पालिका की नई कारिस्तानी सामने आई है। पूरा मामला शहर के बस अड्डे से जुड़ा हुआ है। नगरपालिका ने गुपचुप तरीके से एक बार फिर से शहर के बस अड्डे का टेंडर निकाला है,टेंडर के अनुसार बोली लगनी है..और बोली के लिए व्यापक प्रचार प्रसार आवश्यक होती है और जितना ज्यादा प्रचार प्रसार होगा नगरपालिका की आय उतनी ही बढ़ेगी और ज्यादा से ज्यादा लोग बोली में भाग लेंगे,लेकिन अपने चेहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए इस टेंडर का कोई प्रचार प्रसार नही किया,ताकि किसीको भनक न लगे और चहेते लोगों का काम हो जाए। ऐसे कई और भी टेंडर है,जो इस तरह गुपचुप तरीके से निकाल जा रहे है और अपने चहेतों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। इन सभी टेंडर्स का तहकीकात करके और आपको हकीकत से रूबरू करवाएंगे हमारी इस खास सीरीज टैंडर पुराण में...जो अब लगातार जारी है और हर बार आपको एक नए टेंडर में हुए घपले के बारे बताने का प्रयास करेंगे ताकि हकीकत शहर की जनता के सामने आ सके। अब टैंडर पुराण की भाग संख्या-1 में बात करते "शहर की बसों के प्रवेश पर बस अड्डा शुल्क वसूली ठेका एक वर्ष के लिए" टेंडर किया गया । इसमे सबसे जरूरी बात यह है कि यह ठेका गत वर्ष 2025 में जुलाई माह में हुआ था,शर्त के मुताबिक ठेका एक वर्ष के लिए था और उच्चतम बोली करीब 15 लाख रुपये लगी थी। 

50 प्रतिशत राशि मौके पर जमा हुई,बाकी राशि के लिए इंतजार हुआ तथा करीब 3 माह पूर्व यानी दिसंबर 2025 में सम्बंधित व्यक्ति को वर्क ऑर्डर दिया गया। लेकिन हैरानी बात यह है कि ठेका एक वर्ष था और उससे 9 माह बाद ही दोबारा ठेका निकाल दिया गया और वर्क आर्डर के हिसाब से बात करें तो दिसंबर माह तक ठेका जारी किया गया था। अब बातें यह भी सामने आई है कि सम्बंधित व्यक्ति द्वारा पूर्ण राशि जमा नही करवाने पर ठेका निरस्त करके दोबारा करने की बात कही जा रही है,लेकिन ऐसे आप स्वयंभू बनकर नियम कैसे बना सकते है। जब राशि जमा नही करवाई तो वर्क ऑर्डर कैसे दिया?अगर सम्बंधित व्यक्ति ने चैक दिया तो बैंक में क्यो नही लगाया? अगर बैंक में लगने के बाद बाउंस हुआ तो कार्रवाई क्यो नही की? आपने अपनी सुविधानुसार नियम कैसे बना लिए?..चलो इसको छोड़ भी दे तो बोली का समाचार पत्रों सहित अन्य किसी माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रचार क्यो नही किया। हम आपको बता दे कि तत्कालीन अधिशासी अधिकारी अविनाश शर्मा ने नगरपालिका की आय बढ़ाने और शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के उद्देश्य से बस अड्डे का सौन्दर्यकरण करवाकर ठेका निकाला था। उनकी मंशा अनुरूप बोली भी करीब 15 लाख लग गई। लेकिन अब वर्तमान पालिका प्रशासन ने इस बस अड्डे के माध्यम नगरपालिका की आय बढ़ाने की बजाय अपने नियम कायदे बनाकर गुपचुप तरीके से टेंडर निकाल दिया। अब सवाल तो बनता है कि आखिर यह सब क्यो किया गया किसके दबाव में किया गया और किसको फायदा पहुंचाने के लिए किया गया । आखिर क्यो नियमो को दरकिनार किया गया। अगर वाकई आप पारदर्शिता से कार्य कर रहे है तो बस अड्डे की बोली लगवानी है तो व्यापक प्रचार करो और ज्यादा से ज्यादा लोगों को जानकारी दो ताकि पारदर्शिता बनी रहे आखिर नगरपालिका में यह सब क्या चल रहा हैं. किसके दवाब में हो रहा है क्या इसकी खबर भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने के दावे करने वाले जनप्रतिनिधियों को नहीं है..अगर है तो क्यो आंखे मूंद रखी है या फिर यह टेंडर का अंदरूनी खेल ऐसे ही चलता रहेगा .पब्लिक है साहब सवाल तो पूछेगी..

हमारी टेंडर पुराण आगे भी जारी रहेगी किसी एक नए मुद्दे को लेकर 

What's Your Reaction?

Like Like 3
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 1
Angry Angry 0
Sad Sad 2
Wow Wow 1